सोलहवां रंग सुन्दर कई रथ, आ खड़े हुये नापने पथ ।।१।। प्रथम बैठे सुलोचना जै, रथ था स्वर्णमय ।।२।। क्रमशः राजा अकम्पन, और भी सदस्य गण ।।३।। संगी-संगिनी, चाली संग जै सेना चतुरंगिनी ।।४।। सिर चढ़ न धूल बोले, सो […]
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सोलहवां रंग सुन्दर कई रथ, आ खड़े हुये नापने पथ ।।१।। प्रथम बैठे सुलोचना जै, रथ था स्वर्णमय ।।२।। क्रमशः राजा अकम्पन, और भी सदस्य गण ।।३।। संगी-संगिनी, चाली संग जै सेना चतुरंगिनी ।।४।। सिर चढ़ न धूल बोले, सो […]
ग्यारहवां रंग पा सुलोचन झील, जै सु-लोचन मीन सलील ।।१।। जा पहुँची जै नजर, सीधे वधु चेहरे पर ।।२।। थी बड़भाग, जो देख रही आज, चाँद बेदाग ।|३।। ऐसा चन्द्रमा, न छाये जीवन में, जिसके अमा ।।४।। कलाएँ, सच बताएँ, […]
छठवां रंग लो पुनः लागीं खोजने जै अपना, दृग्… सुलोचना ।।१।। क्या करूॅंगा ? ‘जो पाया हार’ सोच में पड़े कुमार ।।२।। चाली धी-देवी, दाहिनी ‘ओर’ बाँयी चाला कंचुकी ।।३।। कराने लागी परि’चै’ ‘धी’-खोजे’ पै सुलोचना जै ।।४।। ‘वो धी’ […]
जयोदय महाकाव्य =हाईकू= ….पहला रंग…. जै-सुलोचना गाथा, ईश ! नवा के शीष, मैं गाता ।।१।। अच्छा कलम लिखे, इच्छा… दिल न किसी का दुखे ।।२।। हस्तिनापुर नरेश, ‘जय’ अनु-चर तीर्थेश ।।३।। और कथाएँ करायें हँसी, ‘कथा-जय’ सुधा-सी ।।४।। पूर्ण-मुराद, ‘कथा-जै’ […]
*शांति पाठ*अथ पौर्वाह-निक (अप-राह-निक)देव-शास्त्र-गुरु-वन्दना-क्रियायाम्पूर्वाचार्या-नुक्-क्रमेण,सकल-कर्मक्-क्षयार्-थम्,भाव-पूजा-वन्दना-स्तव समेतम्श्री शांति-भक्ति कायोत्सर्गम् ,करोम्यहम् (९ बार णमोकार ) *चौपाई*दर्शन मात्र मेंटता दुखड़ा ।भाँत चन्द्रमा सुन्दर मुखड़ा ।। नासा टिके नैन मनहारी ।करें वन्दना नाथ ! तुम्हारी ।। आप चक्रधर-पञ्चम नामी ।वन्द्य इन्द्र शत, अन्तर्-यामी ।। प्रभो […]
*मंगलाष्टक*अरिहन्त देव इक जगन्नाथ ।भगवन्त सिद्ध सर्वार्थ हाथ ।।आचार्य अहिंसा धर्म सूर ।उवझाय जैन सिद्धान्त तूर ।।रत्नत्रय आराधक मुनिवर ।मंगल-कर होंय, अमंगल-हर ।। सर शचिपति नाया चरणों में । नख मिस शशि आया चरणों में ।।हित वृद्धि सिन्धु प्रवचन चन्दा […]
*वर्धमान मंत्र* ॐ णमो भयवदो वड्ढ-माणस्स रिसहस्स जस्स चक्कम् जलन्तम् गच्छइ आयासम् पायालम् लोयाणम् भूयाणम् जूये वा, विवाये वा रणंगणे वा, रायंगणे वा थम्भणे वा, मोहणे वा सव्व पाण, भूद, जीव, सत्ताणम् अवराजिदो भवदु मे रक्ख-रक्ख स्वाहा ते रक्ख-रक्ख स्वाहा […]
‘नवग्रह विधान’ *समर्पण भावना*टूट चली चिर निद्रा,जुड़ चली अपूर्व जाग ।चीर घना अंधकार,एक जग उठा चिराग ।‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’ हाथ लगी कस्तूरी,दूर दिखी दौड़-भाग ।यादें अवशेष द्वेष,चित् खाने चार राग ।‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’‘धन्य घड़ी, धन्य […]
‘वर्धमान मंत्र’ॐ णमो भयवदोवड्ढ-माणस्सरिसहस्सजस्स चक्कम् जलन्तम् गच्छइआयासम् पायालम् लोयाणम् भूयाणम्जूये वा, विवाये वारणंगणे वा, रायंगणे वाथम्भणे वा, मोहणे वासव्व पाण, भूद, जीव, सत्ताणम्अवराजिदो भवदुमे रक्ख-रक्ख स्वाहाते रक्ख-रक्ख स्वाहाते मे रक्ख-रक्ख स्वाहा ।।ॐ ह्रीं वर्तमान शासन नायक श्री वर्धमान जिनेन्द्राय नमःअर्घं […]
*समर्पण भावना*टूट चली चिर निद्रा,जुड़ चली अपूर्व जाग ।चीर घना अंधकार,एक जग उठा चिराग ।‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’ हाथ लगी कस्तूरी,दूर दिखी दौड़-भाग ।यादें अवशेष द्वेष,चित् खाने चार राग ।‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’‘धन्य घड़ी, धन्य भाग’ भँवरे-सा […]
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