परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 47 जयतु जय विद्यासागर सन्त । झलकते कुन्द-कुन्द भगवन्त ।। सदलगा नन्दन बाग प्रसून । चन्द्रमा मुखड़ा शारद पून ।। मलप्पा-नन्दन, सुत श्री-मन्त । जयतु जय विद्या सागर सन्त […]
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