परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक – 17 यही एक भावन संध्याएं,तव चरणन बीतें मेरीं ।आत्म भाव बिन पल पल खिरतीं,घड़ियाँ ना रीतें मेरीं ।।मरण समय में, समता परिणत,ले यम घर न डाल डेरा ।माथ हमारे, उन […]
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