परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 925 प्यार-वेवजह, इक तुम्हीं ने तो किया है पार-वेवजह, इक तुम्हीं ने तो किया है राजी-खुशी से, न ‘कि कहने से किसी के बल्कि अपनी खुशी से मेरा ये अपना […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 925 प्यार-वेवजह, इक तुम्हीं ने तो किया है पार-वेवजह, इक तुम्हीं ने तो किया है राजी-खुशी से, न ‘कि कहने से किसी के बल्कि अपनी खुशी से मेरा ये अपना […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 924 किसी की याद बहुत आती आ करके फिर वापिस नहीं जाती करिश्मे जैसा अय ! रहनुमा कुछ कर दो ऐसा नहीं आ पा रहा है तो, दे भिजा ही […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 923 रात ख्वाब देखूँ तो, मुझे तुम चाहिये जो सुबहो जागूँ तो, मुझे तुम चाहिये यही उससे गुजारिश मेरी कोई और न ख्वाहिश मेरी दुनिया से बिदा लूँ तो, मुझे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 922 तेरे बिना, आँगन मेरा है सूना सूना तेरे बिना, हैं सावन-भादों के जैसे नैना डाल भी दे एक नजर तू ले भी ले मेरी खबर तू क्या दिन, क्या […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 921 था न इस के काबिल मैं पैरों से उठा लिया मुझे बिठा लिया तुमनें जो अपने दिल में कर लिया विश्वास मुझ पर गैर, बेगाना मैं अजनबी ‘के तुमसे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 920 पड़ते ही श्री गुरु नज़र छू मन्तर कहर बलाओं का बददुवाओं का असर छू मन्तर पड़ते ही श्री गुरु नज़र जय जयतु जय जय गुरुवर ।।स्थापना।। छोड़ते ही धारा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 919 दिल की धक-धक ये झपकन पलक हो शाम, या हो सबेरा नाम लेती रहती है तेरा श्वासों की सरकन नाड़ी की फड़कन ये पलक झपकन नाम लेती रहती है […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 918 ले चलो खींचे मुझे लो लगा पीछे मुझे ओ ! अनियत विहारी है राह एक मंजिल हमारी-तुम्हारी ‘रे लम्बा जो सफर हो तो भले होते हैं मुसाफिर दो सुनो, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 917 तू थोड़ा-थोड़ा, अपना मेरा भी जा बन तू थोड़ा-थोड़ा, कर दे मन-मेरा भी पावन आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता चला आ तू थोड़ा-थोड़ा मंदिर से लगा मेरा भी आँगन ।।स्थापना।। यूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 916 मेरे अपनों में आते रहो मेरे सपनों में आते रहो मेरी आरजू यही तुम यूँ ही हमेशा मुस्कुराते रहो ।।स्थापना।। मैं चढ़ाऊँ तुम्हें नीर ‘के लिखते रहो मेरी तकदीर […]
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