परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 935 जय विद्या जय विद्या बोलो होके भक्ति में मगन लगा के गुरु जी से लगन मैली अपनी चादर धो लो जय विद्या जय विद्या बोलो ।।स्थापना।। लाकर के गंगा […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 935 जय विद्या जय विद्या बोलो होके भक्ति में मगन लगा के गुरु जी से लगन मैली अपनी चादर धो लो जय विद्या जय विद्या बोलो ।।स्थापना।। लाकर के गंगा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 934 ‘रे मन, जय विद्या सागर, विद्या सागर, विद्या सागर बोल बोलने से पहले तोल अपनें वचनों में मिसरी घोल ‘रे मन, जय विद्या सागर, विद्या सागर, विद्या सागर बोल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 933 बिन तेरे लगता ही नहीं ये मन मेरा और कहीं आ दर्शन दे जाओ ना नयना और भिंजाओ ना लगता ही नहीं बिन तेरे लगता ही नहीं ये मन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 932 जरूर धूल कोई मोहन है करीब तेरे अय ! भगवन् मेरे आ नजदीक तेरे अय ! भगवन् मेरे न करता वापिस जाने का मन है करीब तेरे जरूर धूल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 931 बिन झपाये पलक मैं पाता रहूँ झलक यूँ ही तेरी यही आरजू मेरी मैं पाता रहूँ झलक बिन झपाये पलक मैं पाता रहूँ झलक यूँ ही तेरी यही आरजू […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 930 तेरे इतने करीब जो हैं हम नसीब वाले तो है वगैर माँगे मन्नत खुल पड़ी मेरी किस्मत बरस पड़ी तेरी रहमत वगैर माँगे मन्नत हम नसीब वाले तो है […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 929 तेरा चेहरा सबसे जुदा है । चाँद चौदवीं का, तुझ पे फिदा है ।। भले मुझे कहने का कोई हक नहीं, पर मुझे कहने में कोई शक नहीं । […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 928 गुनगुनाता रहूँ तराने तेरे अफसाने तेरे मन में लाता रहूँ यूँ ही शामो-सुबह अय ! इक मिरे जीने की वजह रह-रह के यूँ ही शामो-सुबह गुनगुनाता रहूँ तराने तेरे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 927 मेरी खबर, जो है तुम्हें करूँ क्यूँ मैं, कोई फिकर हूँ गोद में माँ की जब पोत खे माँझी तब क्या हो जाता नहीं बड़ा मुश्किल भी आसान सफर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 926 बसा, आँखों मे तू, हुआ ओझल कब है । आके ख्वाबों में तू, हुआ बोझिल कब है ।। सब है यहां तक ‘कि तू मेरा रब है । तेरे […]
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