परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 955 गुरु कुन्द-कुन्द बगिया के फूल हैं छोटे बाबा हमारे और हम उनके चरणों की धूल हैं हैं हमें प्राणों से प्यारे छोटे बाबा हमारे सारी दुनिया से न्यारे हैं […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 955 गुरु कुन्द-कुन्द बगिया के फूल हैं छोटे बाबा हमारे और हम उनके चरणों की धूल हैं हैं हमें प्राणों से प्यारे छोटे बाबा हमारे सारी दुनिया से न्यारे हैं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 954 नज़र पारखी गुरु ज्ञान सिन्ध की अपने ही जैसी मूरत गढ़ दी दया मयी क्षमा मयी करुणा मयी अपने ही जैसी अहिंसा मूरत गढ़ दी नज़र पारखी गुरु ज्ञान […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 953 गुरु ज्ञान-सिन्ध उपवन पा विद्या-सिन्ध सुमन छाया सुर्ख़ियों में चूँकि छू रहा गगन लगा पंख खुशबू जय-विद्या जय जयतू ।।स्थापना।। भेटूॅं गंगा-सिन्धु नीर झीनी-झीनी संग अबीर क्योंकि है तुझ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 952 सागर-सागर खारा पानी विद्या-सागर अमरित वाणी जग कल्याणी औघड़-दानी विद्या-सागर अमरित वाणी सागर-सागर खारा पानी विद्या-सागर अमरित वाणी ।।स्थापना।। कंचन कलशे भर के जल से भेंट, विहरने गफलत श्वानी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 951 चाहते हैं तेरी पनाह हम चले आते हैं, दर पर तेरे अय ! ईश्वर मेरे रोजाना लिये अपनी निगाह नम चाहते हैं तेरी पनाह हम ।।स्थापना।। स्वर्ण के लेकर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 950 साँचा गुरु विद्या दरबार सुनता भक्तों की पुकार लागी भक्तों की कतार जय जयकार जय जयकार साँचा गुरु विद्या दरबार ।।स्थापना।। ले हाथों में घट रतनार लागी भक्तों की […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 949 प्रति-रुप भगवन्त हैं सन्त चलते फिरते ग्रन्थ हैं आ देव शास्त्र गुरु पूजन कर लें सातिशय पुण्य झोली भर लें सिद्ध स्वयमेव मन्त्र हैं सन्त चलते फिरते ग्रन्थ हैं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 948 जय-विद्या जैसा कोई भी मन्त्र नहीं गुरु-विद्या जैसा कोई भी सन्त नहीं न सिर्फ़ कहता मैं ही ‘रे भारत का बच्चा-बच्चा कहता यही गुरु-विद्या जैसा कोई भी सन्त नहीं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 947 जब तक सूरज, चाँद, सितारे जयवन्तो गुरुदेव हमारे शरण सहारे तारण हारे जयवन्तो गुरुदेव हमारे जब तक सूरज, चाँद, सितारे जयवन्तो गुरुदेव हमारे ।।स्थापना।। जल गुणकारी गागर न्यारी लिये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 946 आ मनुआ फेरें आ, जय विद्या ‘मनके’ फेरने पाप भाव मन के फेरें आ आ मनुआ फेरें आ, जय विद्या ‘मनके’ जयतु, जय जय विद्या जय जयतु, जय जय […]
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