परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 985 दया निधान तुम कृपा निधान तुम अपने समान तुम सबसे महान तुम जयतु जय जय गुरुवरम् जयतु जय जय गुरुवरम् ।।स्थापना।। भिंटाऊँ जल गगरी आश पूरो हमरी अपना लो […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 985 दया निधान तुम कृपा निधान तुम अपने समान तुम सबसे महान तुम जयतु जय जय गुरुवरम् जयतु जय जय गुरुवरम् ।।स्थापना।। भिंटाऊँ जल गगरी आश पूरो हमरी अपना लो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 984 होना मुझसे दूर पलक ना अपने आस-पास ही रखना मैं सार्थ नाम ‘गुल’ हूँ हो तुम मेरी खुशबू मेरे आस-पास ही दिखना होना मुझसे दूर पलक ना मुझे अपने […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 983 सिर्फ और सिर्फ हूँ तेरा मैं है इसका गर्व हमें है इसका गर्व हमें है इसका गर्व हमें सिर्फ और सिर्फ हूँ तेरा मैं ।।स्थापना।। मैं चढ़ाऊँ जल निर्मल, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 982 गुरु शिष्य का रिश्ता कभी न रिसता दिन दिन होता जाता गहरा, और गहरा और गहरा कभी न रिसता, गुरु शिष्य का रिश्ता ।।स्थापना।। रिश्ता गहरा और बनाएँ रोज […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 981 साहुनी-फुहार बरसे द्वार-द्वार झूम उठे दिश्-चार वासन्ती-बहार गुरु किरपा अगम अपार जयजयकार, जयजयकार ।।स्थापना।। छव विरली जल गगरी ले आया गुरु द्वार जय जयकार, जय जयकार साहुनी-फुहार बरसे द्वार-द्वार […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 980 पराये नहीं, है तेरे अपने ही हम यूँ ही रखना बनाये, अपना रहमो-करम हर किसी के लिये, होती है कहाँ, ये आँखें नम ।।स्थापना।। चला आता हूँ मैं, तेरे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 979 सबसे बड़े, गुरु जी मेरे गुरु जी के पैर पड़े ‘के बन चले, मेरे काम बिगड़े शुभ शगुन विरले, गुरु जी मेरे ‘रे सबसे बड़े, गुरु जी मेरे ।।स्थापना।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 978 मेरे सर पर, मेरे गुरु का हाथ है मेरा माथा करे गगन से बात है अब क्या ? अब तो, सुख-साता दिन रात है मेरे सर पर, मेरे गुरु […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 977 लो भक्तों की पुकार सुन जोड़ भव-भव सातिशय पुन अय ! सदन सद्-गुण लो भक्तों की पुकार सुन ।।स्थापना।। मैं लाया जल गागर बनने गुण रत्नाकर अय ! सदन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 976 तुम भक्तों की सुनते हो अपना भक्तों को चुनते हो मैंने भी तुम्हें चुना जब से, ‘कि ऐसा सुना तुम भक्तों की सुनते हो अपना भक्तों को चुनते हो […]
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