सुमतिनाथ आरती जयतु सुमत जय जय । दृग् नम सदय हृदय ।। उतारुँ आरतिया करने पापों का क्षय । ले दीपों की थरिया ।। उतारूँ आरतिया पहली, विरली गरभ परब की आरतिया बरसा रतन हरषा सपन देख देख मनवा मैय्या […]
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सुमतिनाथ आरती जयतु सुमत जय जय । दृग् नम सदय हृदय ।। उतारुँ आरतिया करने पापों का क्षय । ले दीपों की थरिया ।। उतारूँ आरतिया पहली, विरली गरभ परब की आरतिया बरसा रतन हरषा सपन देख देख मनवा मैय्या […]
अभिनन्दन नाथ आरती अभिनन्दन, शत शत वन्दन । भगवन् अर्हन अभिनन्दन ।। कर आरति तुम हाथ धन । लख मूरति तुम आँख धन ! भगवन् अर्हन अभिनन्दन । अभिनन्दन, शत शत वन्दन ।। भगवन् अर्हन अभिनन्दन । परब गरभ आरति […]
संभवनाथ आरती आरती संभव जिन । मैं उतारूँ निश-दिन । बाती कपूर वाली । मण रत्नों की थाली ।। दीप सजा के अनगिन । आरती संभव जिन । मै उताऊँ निश-दिन । रतन बरसे नभ से । सपन लख माँ […]
अजितनाथ आरती जय जिन अजित, अजित जिन जय-जय । करे आरती कर्म सभी क्षय । हरे आरती सप्त सभी भय ॥ आरती प्रथम गर्भ कल्याणा | उतर स्वर्ग का भू पर आना ॥ दिव्य रतन बरसा अम्बर से । सपने […]
श्री १००८ आदिनाथ भगवान्आरती थाल सजाओ । ज्योत जगाओ ।।आदि ब्रह्म की आरती, उतारें आओ । सपना नाता ।अपना माता ।।बरसे रतन, रतन बरसाओ ।ढ़ोल बजाओ ।नाचो, गाओ ।। गिरि मरु-नन्दा ।स्वर्ण सुगन्धा ।।सहस नयन से नयन बनाओ ।ढ़ोल बजाओ […]
आदिनाथ ‘वृहद्-चालीसा’ दोहा लगा रहे काँधे बिठा, भवि भक्तों को पार । गूॅंज रही इक सुर तभी, ‘आदि ब्रह्म’ जयकार ।। चौपाई ‘जम्बू’, पूर्व विदेहा विरली । पुष्कल-देश, पुण्ड़रिक नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । वज्रनाभि नृप नाम […]
अजित ‘वृहद्-चालीसा’ दोहा मुकुट बद्ध राजा सभी, खडे़ माथ रख हाथ । जन्म समय तब पड़ चला, नाम ‘अजित’ तुम सार्थ ।। चौपाई ‘जम्बू’ पूर्व-विदेहा विरली । वत्सिक देश सुसीमा नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम विमल […]
संभवनाथ वृहद चालीसा दोहा स्वस्ति झिर चली नाम से, फूटे ज्यों गुल गन्ध । जिन संभव वन्दन तिन्हें, श्रद्धा लिये अमन्द ।। चौपाई जम्बू पूर्व विदेहा विरली । कच्छिक देश, क्षेमपुर नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम […]
अभिनन्दन नाथ वृहद चालीसा दोहा अभिनन्दन गुण गण किया, कर अवगुण अवसान । यूँ ही ‘सहज’ न बन चले, अभिनन्दन भगवान ।। चौपाई जम्बू पूर्व विदेहा विरली । मंगल रत्न संचयन् नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो नाम महाबल […]
सुमतिनाथ वृहद चालीसा दोहा नाम सुमत रख, कर चली, माँ मत-हंसी साथ । बात कुछ निराली तभी, भवव-तार इक हाथ ।। चौपाई पूर्व विदेह धातकी विरली । पुष्कल देश, पुण्डरिक नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । वहाँ नाम […]
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