कुछ बेटे ऐसे होते हैं जो माँ को रूलाते हैं और कुछ बेटे ऐसे होते हैं जो माँ के दुःख में रोते हैं। अपना जीवन न्यौछावर कर देते हैं, जिन्हें अपनी माँ की चिंता हैं ऐसे ही बेटे की कथा […]
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कुछ बेटे ऐसे होते हैं जो माँ को रूलाते हैं और कुछ बेटे ऐसे होते हैं जो माँ के दुःख में रोते हैं। अपना जीवन न्यौछावर कर देते हैं, जिन्हें अपनी माँ की चिंता हैं ऐसे ही बेटे की कथा […]
“खो न जाये , शान हमारी है बेटी तुम ऐसा काम नही करना ।बिटिया रानी तुम परदेश मे रहकर, लाज हमारी सदा बचाये रखना ॥तुम तो दोनो कुलों का दीपक हो , तुमसे ही शान रही मेरी ।मेरा सिर शर्म […]
फूल कभी दोबारा नही खिलते, जन्म कभी दोबारा नही मिलते ।मिलते हैं हजारो लोग मगर, हजारो गल्तियाँ माफ करने वाले, माँ बाप नही मिलते ॥“फिक्र में बच्चे के कुछ ऐसे ही धुल जाति है माँ ।नौजवाँ होते हुये भी वह, […]
मंगलाचरणणमो अरिहंताणं,णमो सिध्दाणं,णमो आइरियाणं,णमो उवज्झायाणं,णमो लोए सव्वसाहूणं.एसो पंच णमोयारो सव्व पावप्पणा सणो ।मंगलाणं च सव्वेसिं पढमं होइ मंगल ।।विष से भरा विषय भोग को भोग रहा था मैं भोगी ।जनम-मरण, भय रोग से, तडफ रहा था मैं वन योगी ॥तीन […]
(तर्ज – हे मेरे वतन के)जागो जैनी जागो, अब यह समय आया है ।हम अपनी पहचान बनाकर, जग को ये बतलायें ॥हम तो बहुत संख्या में हैं, -ऽ ये जग को हम बतलायें ।हम अपने नाम के आगे, हम जैन […]
संयम शरणं अंते समाहिमरणं रात को सोते समय ४ नियम लेना हे भगवन् सुबह — बजे तक के लिए ४ नियम लेता / लेती हूँ । १) हे भगवन् सुबह — बजे तक के लिए चारो प्रकार के आहार पानी […]
श्री शांति सूरि मुनिधर्म – प्रकशकाय ,श्री वर्धमान – मुनिवर्य शुभंकराय ।मुन्यादिसागर प्रभावक – धर्मनेत्रे ,त्रैलोक्य – वंद्य गुरूवर्य नमोऽस्तु तुभ्यम् ॥१॥ श्री वीर शासन विभासन बध्दकक्षं ,शीतांशु – शुभ- यशसा – धवलिकृताशम् ।कल्याण – वल्लि – जलदं श्रुतसि न्धुवर्यम् […]
संस्कारो के शंखनाद का पुणे 2015 में, लिखने का मन बना डाला ।शिरगुप्पी में १७ जुलाई से २७ अगस्त, तक इसको मूर्त रूप दे डाला ॥गुरूओ से जो कुछ सुना पढ़ा, वो सब इसमें समाहित कर डाला ।संस्कारो के माध्यम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित आचार्य संघ विधान ।। प्रशस्ति ।। गुरु गागर ज्ञान उड़ेली ।मति हंस करे अठखेली ।।विद्या सागर जयकारा ।जन जैन अजैन सहारा ।।१।। हो सार समय पाहुड के ।गुरु कुन्द-कुन्द गुरुकुल के ।।संयमित […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित दश लक्षण धर्म विधान पूजन आओ ‘री आओ, सखि ! आओ ‘री आओ ।दश धर्मों की पूज रचाओ, आओ ‘री आओ ।।हृदय वेदिका शुद्ध बनाओ ।धर्म क्षमादिक दश पधराओ ।आह्वानन संस्थापन सन्-निधी,करके […]
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