परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 160गुरु चरणगुरु चरणगुरु चरणशरद पूरण-अवतरण ।शश-पूरण-शरद ‘वरण’ ।।चल तीरथ विद्या श्रमण ।इक शरण- इक शरण- इक शरण।। स्थापना।। नीर कर, कर कर नमन ।भेंटता आ तर नयन ।। इक अवर […]
-
Recent Posts
Recent Comments
