परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 180 निराकुलता से नेह इन्हें ।निराकुल रहना गेह इन्हें ।।सिन्धु विद्या छोटे बाबा ।हरो छल-छिद्र वा छलावा ।। स्थापना।। नीर से भर लाये झारी ।तुम्हीं से बनने अविकारी ।।सिन्धु विद्या छोटे […]
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