परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 190 कहाँ इन सा निराकुल पना ।रहे सबको निराकुल बना ।। सिन्धु-विद्या श्रमण दृढ़-मना ।हाथ-थाम लो हहा तम घना ।। स्थापना।। लिये जल से भरी गगरिया ।स्वप्न कब से परी […]
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