परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 210 निराकुल और न्यारे ।बच्चे जिनको प्यारे ।।रब से छोटे बाबा ।सब के तारण-हारे ।। स्थापना ।। बच्चे जब भी आते ।मुस्काँ नुख्सा पाते ।।जल ले आये, गुरु जी ! ।झूमते […]
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