परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 280 हाईकू आ हृदय में पधारो ‘आमंत्रण’ मेरा स्वीकारो ।।स्थापना।। भेंटूँ नीर, दो तीर से जोड़ नाता, मेरे विधाता ।।जलं।। भेंटूँ गन्ध, दो नन्त से जोड़ नाता, मेरे विधाता ।।चन्दनं।। […]
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