परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 290 ==हाईकू== छत्रछाँव पा जाँऊ जो थारी, जाऊँ तो बारी-बारी ।।स्थापना ।। स्वीकारो, आज भी रोज घाँई आया, रहा रो, साँई ।।जलं।। स्वीकारो, आज भी रोज घाँई लाया गंध ओ […]
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