परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 310 =हाईकू=आप जिन्दगी में क्या आये,विघटे, बदरा छाये ।।स्थापना।। श्री चरणों में, दे दो जगहजल स्वीकारो यह ।।जलं।। आभरणों में, दे दो जगहगंध स्वीकारी यह ।।चन्दनं।। पल-कर्णों में, दे दो […]
-
Recent Posts
Recent Comments
