परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 320 हाईकू चूनर चाँद-तारे जड़े, गुरु जी हम भी खड़े ।।स्थापना।। आ जाया करो यहीं रोज ही, भेंटूँ जल गुरुजी ।।जलं।। चन्दन चचूँ, आ जाना कल पुन:, चरण पर्शूं ।।चन्दनं।। […]
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