परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 340 हाईकू मेरे भगवन्दर्शन आ दोनैना सावन भादों ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ,कल फिर बुलाने ‘कि मना पाऊँ ।।जलं।। गंध चढ़ाऊँ,‘कि पुन: ऐसे पल-स्वर्णिम पाऊँ ।।चन्दनं।। थाली धाँ शाली चढ़ाऊँ,दीवाली ‘कि रोज मनाऊँ […]
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