परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 360 =हाईकू=आशु जिनके आँसु आ जाते,गुरु उनमें आते ।।स्थापना।। रख लो भक्तों की श्रृंखला में,जल ये, ‘दो गला मैं’ ।।जलं।। रख लो हंसों की श्रृंखला में,गंध ये, ‘दो गला मैं’ ।।चन्दनं।। […]
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