परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 370 हाईकू पीछी तो है ही ‘ना’ साथ, थाम मेरा भी लो ‘ना’ हाथ ।।स्थापना।। तुम तारते, सुन ये, लिये जल-दृग् पुकारते ।।जलं।। तुम दृष्टि-माँ निहारते, ले गंध-सो पुकारते ।।चन्दनं।। […]
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