परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 380 हाईकू आता उन्हीं में मैं भी,तुम्हें अपनी जिन्होंने जाँ दी ।।स्थापना।। मर्कट-मन, शान्त बैठाने,आये तर दृग्-कोने ।।जलं।। मर्कट-मन, शान्त बैठाने,लाये गंध चढ़ाने ।।चन्दनं।। मर्कट-मन, शान्त बैठाने,लाये शाली धाँ दाने ।।अक्षतं।। […]
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