परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 390 *हाईकू*न कुछ और सिन्धु,सिवाय माँओं के अश्रु बिन्दु ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग् जल,समकित मेरा ‘कि बने निर्मल ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन,न खेले लुका-छुपी ‘कि सम्यक्-दर्शन ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत,पाऊँ सम्यक् -दर्शन ‘कि अनछत […]
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