परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 400 =हाईकू= उन्हें दे ‘दिया’ सुखी कर,दुःखी मैं भी गुरुवर ।।स्थापना।। कहे अल्बिदा तू-तू मैं-मैं,‘कि जल भिटाऊँ तुम्हें ।।जलं।। अपना बना लो हमें,‘कि चन्दन भिटाऊँ तुम्हें ।।चन्दनं।। सुनो, अपना लो हमें,‘कि […]
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