परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 410 *हाईकू*गुरुजी जिन्हें, ले स्वीकार,समझो वे हुये पार ।।स्थापना।। पा पंक्ति आप करीबी जाऊँ,जल झारी चढ़ाऊँ ।।जलं।। पा पंक्ति आप भक्त जाऊँ,चन्दन झारी चढ़ाऊँ ।।चन्दनं।। पा पंक्ति आप कृपा-पात्र जाऊँधाँ, शाली […]
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