परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 420 “हाईकू”सिर्फेक सन्त,अविरोध सभी को आते पसन्द ।।स्थापना।। बाला चन्दन, भाव-भर मैं,भेंटूँ दृग् जल तुम्हें ।।जलं।। ग्वाला कोण्डेश, भाव-भर मैं,भेंटूँ चन्दन तुम्हें ।।चन्दनं।। अधिप शत, भाव-भर मैं,भेंटूँ अक्षत तुम्हें ।।अक्षतं।। अंकवाँ […]
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