परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 450 *हाईकू*कर स्वीकार,‘सेव-सेवक-खेव’दो लगा पार ।।स्थापना।। अपना जल,मेरा पूरा सपना किया, शुक्रिया ।।जलं।। घिसा चन्दन,मेरा ये जो अपना लिया, शुक्रिया ।।चन्दनं।। कहाँ शाली, धाँ खाली,थाली अपना लिया, शुक्रिया ।।अक्षतं।। भूल-नन्दन […]
-
Recent Posts
Recent Comments
