परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 460 =हाईकू= पा…पा दृग्-नीर, हुई कोरा-कागज आपकी तस्वीर ।।स्थापना।। फल चाहा न जिन्होंने, भेंटूँ जल उन्हीं सा होने ।।जलं।। द्वन्द चाहा न जिन्होंने, भेंटूँ गंध उन्हीं सा होने ।।चन्दनं।। दुध्याँ […]
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