परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 480 हाईकू ‘पा गुरु कृपा’ बना आईना, साँच-में, था काँच मैं ।।स्थापना।। पहुँचे कर्ण-द्वार हृदय पीर, भेंटूॅं दृग्-नीर ।।जलं।। शीतल आप पा जाऊँ दो वचन, भेंटूॅं चन्दन ।।चन्दनं।। पदवी अब […]
-
Recent Posts
Recent Comments
