परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 490 -हाईकू-है बड़ी जान, बात इसमें ‘कि हैं गुरु भगवान्।।स्थापना।। चन्दन पग पखारे, दृग् सजल मैं खड़ा द्वारे ।।जलं।। अंजन नभ बतियाये, हम भी चन्दन लाये ।।चन्दनं।। बुलबुल ने ‘पर’ […]
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