परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 500 =हाईकू=रुलाती तेरी यादयाद मेरी क्या तुझे भी आती ।।स्थापना।। कीजिये और निकट, दास और ये जल घट ।।जलं।। कीजिये और निकट, दास और ये गंध घट ।।चन्दनं।। कीजिये और […]
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