परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 520 *हाईकू* बिन स्वस्ति-ए-श्री गुरु, ‘कामयाबी’ न होती शुरु ।।स्थापना।। लाये उदक घट, जन्म-मृत्यु ‘कि जाये विघट ।।जलं।। लाये चन्दन घट, भवातप ‘कि जाये विघट ।।चन्दनं।। चढ़ाने लाये अक्षत, संकट […]
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