परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 550 =हाईकू=स्वयम्-से, ‘आगे देखना चाहें बच्चों को माँएँ खम्-से ।।स्थापना।। ले नीर, छुई चौखट,हो चौपट, ‘कि भव-पीर ।।जलं।। ले गंध, छुई चौखट, हो चौपट, ‘कि कर्म-बंध ।।चन्दनं।। ले धान,छुई चौखट,हो […]
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