परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 600 हाईकूसुनते आप जगत् की, सुन चला आया ‘तुरत-ही ।।स्थापना।। आया द्वारे मैं तिहारे, ले जल, ए ! विश्वास म्हारे ।।जलं।। आया द्वारे मैं तिहारे,ले चन्दन कलशे न्यारे ।।चन्दनं।। आया […]
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