परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 610 =हाईकू=आओ, देवता ओ ! मेरे मन की, खो चंचलता दो ।।स्थापना।। जीभ चिढ़ाते गम, त्राहि माम्नीर चढ़ाते हम ।।जलं।। आँख दिखाते गम, त्राहि माम् गंध चढ़ाते हम ।।चन्दनं।। हाथ […]
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