कुन्थनाथलघु चालीसा‘दोहा’‘जयतु-कुन्थ-जिन’ जाप की,महिमा अपरम्पार ।शचि, शचि-पति छू कर जिसे,भव ‘फिर-के’ उस-पार ।। कुन्थ-कुन्थ-कुन्थ, जय-कुन्थ जपो मन ।शील शिरोमण ! विघ्न विमोचन ।।१।। बरसेगी, बरसी भी भगवत कृपा ।सीता सती ने जाप यह जपा ।पानी में बदले अंगार हैं ।किस्से […]
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