परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 630 =हाईकू= ‘जि निहारो, ये दुखिया-कुटिया भी, कभी पधारो ।।स्थापना।। कर सकने, ये मन प्रांजल, मैं भेंटूॅं दृग्-जल ।।जलं।। कर सकने, ये मन निरंजन, भेंटूॅं चन्दन ।।चन्दनं।। कर सकने, ये […]
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