परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 640 =हाईकू=जगह पाँव-पास की,यूँ हो ‘कि हो, इस दास की ।।स्थापना।। चढ़ाऊँ नैन नीर,आऊँ ‘कि पाँत चीरन चीर ।।जलं।। चढ़ाऊँ गंध झारी,आऊँ ‘कि पाँत निरतिचारी ।।चन्दनं।। चढ़ाऊँ शालि-धान,आऊँ ‘कि पाँत […]
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