परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 660 ‘जि त्राहि माम् ये हेरा-फेरी, जाँ लेने पे तुली मेरी ।।स्थापना।। आये शरणा स्वामी, ले झारी नीर, मेंटिये पीर ।।जलं।। आये शरणा स्वामी, ले झारी गंध, मेंटिये बंध ।।चन्दनं।। […]
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