परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 684 =हाईकू=भले सबके तुम, सिर्फोर-सिर्फ तुमरे हम ।।स्थापना।। लिये जल दे रहा ढोक, त्राहि माम्हा ! स्वार्थी लोक ।।जलं।। लें चन्दन दे रहा ढोक, त्राहि माम् हा ! माखी लोभ ।।चन्दनं।। […]
-
Recent Posts
Recent Comments
