परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 694 =हाईकू=कुछ भी नहीं मैं तेरा, सब कुछ तुहीं पै मेरा ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग् जल, न उठाऊँ कॉलर, पानी पे लिख ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, न मचाऊँ पुन: ‘ कि रुदन-वन […]
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