परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 735 कभी लौटाते न हाथ खाली, गुरु गो-देवों वाली ।।स्थापना।। दृग्-जल भेंटूँ आन-के, दृग् सजल तुम्हें जान के ।।जलं।। चन्दन भेंटूँ आन-के, द्यु-स्यंदन तुम्हें जान के ।।चन्दनं।। शालि-धाँ भेंटूँ आन-के, […]
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