परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 745 हाईकूले लो शरण में,मुझे जगह दे दो चरण में ।।स्थापना।। रहा उलझ, अपना लो, जल,‘कि जाऊँ सुलझ ।।जलं।। पनीले नैन, अपना लो, चन्दन, ‘कि पाऊँ चैन ।।चन्दनं।। बजे द्वादश, […]
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