परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 755 =हाईकू=मेंटी चन्दन पीरा, ए ! मेरे वीरा, हूँ मैं भी तेरा ।।स्थापना।। प्रणाम मेरे, कर स्वीकार लो, ये पानीय घड़े ।।जलं।। वन्दन मेरे,‘स्वीकार लो’ये घडे़, चन्दन मेरे ।।चन्दनं।। ढोक […]
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