परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 765 आ किया तुमने बड़ा अहसान हैमेरी जिन्दगी में,तेरी बन्दगी में,जैसे ‘कि, आया झुकता आसमान हैवैसे ही जाये झुकता यही अरमान है।।स्थापना।। साथ श्रद्धा सुमन, आपके चरणों में, दृ्ग्-जल अर्पण,अय ! […]
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