परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 785 गुल पीछे, आगे तेरी मुस्कान हैबुलबुल पीछे, आगे तेरी सुर-तान हैन फैलानी पड़ी, झोली पाई भरी, मेरा दिल पीछे, आगे तेरी अदा-ए-एहसान हैगुल पीछे, आगे तेरी मुस्कान है ।।स्थापना।। […]
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