परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 805 भावी, वर्तमान तुहीं अतीत मेरा ।शुरु तुम्हीं से, तुम्हीं से खत्म हर गीत मेरा ।।रखना यूँ ही मुझे, अपने आस-पास । कहीं जाके फिर न आने वाला, अखीर श्वास, […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 805 भावी, वर्तमान तुहीं अतीत मेरा ।शुरु तुम्हीं से, तुम्हीं से खत्म हर गीत मेरा ।।रखना यूँ ही मुझे, अपने आस-पास । कहीं जाके फिर न आने वाला, अखीर श्वास, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 804 मुझे देख उलझन में, गुरु जी आ गये छिन में, छू न पाये भू, मेरे आँसू जय-जय, जयतु-जय श्री गुरु, जय-जय, जयतु-जय श्री गुरु ।।स्थापना।। क्षीर सागर । नीर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 803 हमारे सर पे रख दो हाथ, एक फरियाद न और मुराद, तुम मुझे रख लो अपने साथहमारे सर पे रख दो हाथ, एक फरियाद न और मुराद ।।स्थापना।। नीर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 802 शरण तेरी आये, त्राहि-माम्, अय ! मेरे राम, दुख दिल दुखाये, शरण तेरी आये, त्राहि-माम्, अय ! मेरे राम, दुख दिल दुखाये ।।स्थापना।। लाये नीर, घनेरी पीर, त्राहि-माम्, अय […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 801 गया पतझड़, आया सावन भर चला खुशिंयों से दामन चाँद पूनम शरद मेरा आज आया उतर आँगन ।।स्थापना।। क्यूँ न मैं, भेंटूँ मण कलशे, लबालब क्षीर सिन्ध जल से, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 800 दी ये जिन्दगी है तेरी, इस ‘दीये’ दी ये रोशनी है तेरीथी चल रही जोर सेहवा चारों ओर सेकर ओट तुम्हीं ने तो, आँचल के छोर सेकी रक्षा है […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 799 हाईकूतेरी न कोई खता, मैं ही शबरी न बन सका । न कर तेरा इन्तजार, जो तेरे द्वार आ खड़ा । पर करता भी क्या, थम ही रहे थे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 798 फिर फिर नजर छू रही जिगर हो तुम जो भीतर अय ! मेरे गुरुवर क्या अचरज इसमें है न देखा किसने सूरज जहाँ, सूरज मुखी आ ही रहा राजी-खुशी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 797 हाईकूइन चरणों से अपने, करना न जुदा मुझे । तुझसे पीछे कदम, याद आता है खुदा मुझे । मेरी साँसों में और कौन, तू ही तो आता जाता है […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 796 हाईकूउसे गुरुदेव ने, तकलीफ़ कभी होने नहीं दी जिसने गुरुदेव की, तस्वीर कभी खोने नहीं दी दयामयी गुरुदेव, मेरे क्षमामयी गुरुदेव, किरपा अपनी मेरे ऊपर, रखना बना सदैव, क्षमामयी […]
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