परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 815 खींचे अपनी ओर रखनायूँ ही थामे डोर रखना है न कुछ और कहना सुनो ना, गुरु जी सुनो नाहै न कुछ और कहनायूँ ही थामे डोर रखना खींचे अपनी […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 815 खींचे अपनी ओर रखनायूँ ही थामे डोर रखना है न कुछ और कहना सुनो ना, गुरु जी सुनो नाहै न कुछ और कहनायूँ ही थामे डोर रखना खींचे अपनी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 814 तुम्हारे सिवा मेरे दिल में,कोई और रहता नहींकहता यही रोंआ-रोंआ,सिर्फ मैं ही कहता नहींतेरे ख्यालों में खोये रहते है हमअपनी आँखें भिंजोये रहते है हमहरदम,दर कदम,जब देखो तभी,‘जि गुरु […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 813 न चाहता मैं, करना तुम्हें, परेशान जरा भी, बस दे दीजिये एक मुस्कान जरा सी, ‘जि गुरु जीकरना तुम्हें, न चाहता मैं, परेशान जरा भी, ‘जि गुरु जी ।।स्थापना।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 812 धूल चरणन तेरी चन्दन मुझे । तेरा गुरुकुल, वन-नन्दन मुझे । तेरी इक नजर, मेरी हमसफर । जीने के लिये, अब न चाहिये धडकन मुझे । धूल चरणन तेरी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 811 उनकी बदल तकदीर गई, नैय्या उपल लग तीर गई, लग हाथों में, टिक आँखों में, जिनके श्री गुरु तस्वीर गई, उनकी बदल तकदीर गई ।।स्थापना।। धार छोड़ी जिनने, गुरुदेव […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 810 चन्द्रमा चकोरा जैसे, मकरन्द भौंरा जैसे, तुम्हें चाहता,अय ! मेरे मन के देवताये मेरा मन मयूरा वैसे, तुम्हें चाहता,अय ! मेरे मन के देवता ।।स्थापना।। न यूँ ही आता […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 809 अन्छुये नजारे छुओ, तुम चाँद-सितारे छुओ, बस यही, दिली-ख्वाहिश मेरी, तुम साल-हजार जिओअजि ओ ! गुरु जी अहो ! अन्छुये नजारे छुओ, तुम चाँद-सितारे छुओ, बस यही, दिली-ख्वाहिश मेरी, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 808 मेरे कोटि प्रणामआपके चरणों मेंसुबह और शामभगवन् मेरे ! मेरे कोटि प्रणामआपके चरणों में,बड़ी मेहरवानीबदली मेरी जिन्दगानीआ आपके चरणों में भगवन् मेरे ! मेरे कोटि प्रणाम ।।स्थापना।। क्यूँ न […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 807 बड़े तपस्वी,इक तेजस्वी,नन्दन माँ श्री-मन्त, इक ओजस्वी,निरे मनस्वी, विद्या सागर सन्त, नन्दन माँ श्री-मन्त, बड़े तपस्वी,इक तेजस्वी, नन्दन माँ श्री-मन्त,वन्दन कोटि अनन्त ।।स्थापना।। अरहत् भावी, सरल स्वभावी, भेंटूँ जल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 806 गुरु पूर्ण माँ, नमो-नमः नमो-नमःअवतार क्षमागुरु पूर्ण माँ, नमो-नमः नमो-नमः ।।स्थापना।। सागर क्षीर,भेंटूँ नीर, हेत मनस् नव-जात समां, नमो-नमः नमो-नमःअवतार क्षमागुरु पूर्ण माँ, नमो-नमः नमो-नमः ।।जलं।। विनय समेत, मलयज […]
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