परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 825 गुरु आशीष गुरु आशीष मिलने लगा मुझे निश-दीस मैं हो चला धन पा तुम्हें अय ! मेरे भगवन् पाया मैनें नव-जीवन मैं हो चला धन मिलने लगा मुझे निश-दीस […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 825 गुरु आशीष गुरु आशीष मिलने लगा मुझे निश-दीस मैं हो चला धन पा तुम्हें अय ! मेरे भगवन् पाया मैनें नव-जीवन मैं हो चला धन मिलने लगा मुझे निश-दीस […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 824 सिन्ध विद्या नमन सिन्ध विद्या नमन ले पनीले नयन साथ श्रद्धा सुमन सिन्ध विद्या नमन सिन्ध विद्या नमन ।।स्थापना।। हेत सम्यक्-दरश भेंट जल मण कलश ले पनीले नयन साथ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 823 छोर-छोर से चारों ओर से आई आवाज़ जोर से शरण सहारे तारणहारे विद्या सागर गुरु हमारे आ बँध चालो भक्ति दोर से आई आवाज़ चारों ओर से ।।स्थापना।। भेंटो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 822 तट वैतरण आशा किरण गुरुवर चरण जय जयतु जय थापूँ हृदय हित पाप क्षय जय जयतु जय ।।स्थापना।। जल क्षीर घट हित तीर तट भेंटूँ सविनय जय जयतु जय […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 821 जरा-सी ठोकर क्या लगी गुरु जी उड़ के आ गये उड़ा के दुख-दर्द ले गये फूँक माँ गुरुजी गुरुजी नमो नम: सचमुच गुरु पूर्ण माँ ।।स्थापना।। भेंटूँ जल कलशे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 820 वैतरण तरण कल-काल शरण तम, आश किरण गुरुदेव चरण जयकारा गुरुदेव का… जय जय गुरुदेव बरसाये रखना कृपा सदैव जयतु जय, जय जय गुरुदेव ।।स्थापना।। होने हल्का कलशा जल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 819 दिव गठबंधन कल शिव स्यन्दन पुरु लघु नन्दन सद्-गुरु वन्दन शत-शत वारा जय जय कारा, जय जय कारा ।।स्थापना।। क्षीरी सागर पीरी गागर छोडूँ धारा सद्-गुरु चरणन सद्-गुरु वन्दन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 818 सत् शिव सुन्दर ज्ञान-समुन्दर जय गुरुवर, जय विद्या सागर ज्ञान दिवाकर ! जिन गुण आगर ! जय गुरुवर, जय विद्या सागर सत् शिव सुन्दर ज्ञान-समुन्दर जय गुरुवर, जय विद्या […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 817 धर्म अहिंसा नूरमन्शा सहज प्रपूरजयतु जयतु जय जयविद्या सागर सूर ।।स्थापना।। बनने धीर-गंभीरप्रासुक गंगा नीरभेंटूँ साथ विनयजयतु जयतु जय जयधर्म अहिंसा नूरमन्शा सहज प्रपूरजयतु जयतु जय जयविद्या सागर सूर ।।जलं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 816 जप मन सुबहो शाम विद्या सागर नाम सबसे प्यारा है जब से न्यारा है शरण सहारा है विद्या सागर नाम तारण हारा है जप मन सुबहो शाम विद्या सागर […]
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