परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 855 दीदार बिन तेरे बेकरार नयन मेरे आँसू बेशुमार है तुझको रहे बुला क्यूँ मुझको दिया भुला अय ! भगवन मेरे दीदार बिन तेरे बेकरार नयन मेरे अय ! भगवन […]
-
Recent Posts
Recent Comments

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 855 दीदार बिन तेरे बेकरार नयन मेरे आँसू बेशुमार है तुझको रहे बुला क्यूँ मुझको दिया भुला अय ! भगवन मेरे दीदार बिन तेरे बेकरार नयन मेरे अय ! भगवन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 854 =हाईकू= विद्या शरद पूनम चाँदा, और ज्ञान सागर । लुटाये कहाँ से, यही से तो भर-भर गागर ।। वो ज्ञानामृत, प्यासे हम भी जरा हमें भी दे दो । […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 853 =हाईकू= कोई सपनों में आता है मेरे, तो सिर्फ तुम हो । कोई अपनों में आता है मेरे, तो सिर्फ तुम हो ।। बनके आती जाती श्वास, तू रहे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 852 तुम आ गये, आज जैसे आ जाना, कल भी वैसे । मीन मैं, जल तुम बिना, हो तो हो रहना कैसे ॥ देखो ना रोज, खातिर सरोज आ सूरज […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 851 अपलक, पाता रहूँ तेरी झलक, यूँ ही करीब बैठ के तेरे अय ! गुरुदेव मेरे ।।स्थापना।। मैं चढ़ाऊँ दृग्-जल पाने कुछ स्वर्णिम पल ‘के अपलक पाता रहूँ तेरी झलक, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 850 =हाईकू= पाके अपने द्वार तुझे है मिला जहान मुझे । था जिसे ढूँढ रहा मैं, वह मिला भगवान् मुझे ।। है गुजारिश मेरी, अब यही, है ख्वाहिश मेरी । […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 849 गुरुदेव कृपा-वन्त गुरुदेव शुभ-शगुन छूते ही गुरु चरण काम बन चला तुरन्त गुरुदेव दया-नन्त गुरुदेव कृपा-वन्त ।।स्थापना।। भेंटते ही नीर सिन्धु काम बन चला तुरन्त गुरुदेव दया-नन्त गुरुदेव कृपा-वन्त […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 848 जुड़ चाले नाम मेरा, तेरे नाम से जैसे जुड़ा नाम मीरा, हरी श्याम से श्री राम से नाम जैसे जुड़ा मारुति नन्दन भगवति चन्दन नाम जैसे जुड़ा महावीर स्वाम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 847 =हाईकू= अपने पाँवों के पास का, दे मुझे दो एक कोना । ये दुनिया तो ‘साधे स्वार्थ’, समझे मुझे खिलौना ।। ‘के तुम, साफ नज़र आओ, जहाँ से मेरे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 846 किया वादा देने का साथ तुमनें जब से है फेरा मेरे सिर पर हाथ तुमनें तब से गुम कहीं थकान हुई मेरी जिन्दगी आसान हुई मैं जुड़ने लगा, बेजोड़ […]
© Copyright 2021 . Design & Deployment by : Coder Point
© Copyright 2021 . Design & Deployment by : Coder Point