परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 865 विद्या सागर जयकारे आ मनुआ ‘रे लगायें मिल के हम सभी, विद्या सागर जयकारे न जाते खाली कभी, विद्या सागर जयकारे आ मनुआ ‘रे लगायें मिल के हम सभी, […]
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परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 865 विद्या सागर जयकारे आ मनुआ ‘रे लगायें मिल के हम सभी, विद्या सागर जयकारे न जाते खाली कभी, विद्या सागर जयकारे आ मनुआ ‘रे लगायें मिल के हम सभी, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 864 जय-विद्या जप ले ‘रे मनुअा जय-विद्या जप ले और मेंट ले, किये हुये, अब-तक के पाप पिछले जय-विद्या जप ले ‘रे मनुअा जय-विद्या जप ले ।।स्थापना।। मण जल गगरी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 863 विद्यासागर जी की जय विद्यासागर जी की जय आओ मिल के हम सभी, बोलें विद्यासागर जी की जय करने दुक्खों का क्षय पाने कर्मों पे जय आओ मिल के […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 862 तेरे अपनों में आके तुझे सपनों में पाके मैंने जन्नत ही पा ली सोई किस्मत जगा ली तुझे सपनों में पाके तेरे अपनों में आके मैंने जन्नत ही पा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 861 तेरे चहरे पे, आ रुक जाती है नजर मेरी । और हाँ…झुक जाती है, उठते ही नज़र तेरी ।। है ये मुझे क्या हुआ, दे बता, है यह मुझे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 860 =हाईकू= कब आओगे, ले सुमरनी, जपे थी धड़कन । आ गये तुम जो, तो जा रही, थमी-सी धड़कन ।। और बन-के गंग-जमुन, झिर चाले नयन । राखना लाज, सुन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 859 आँखों के आँसू मेरे, आज थमने से करें मना । लिया अपना, तूनें जो मुझे, लिया अपना बना ।।स्थापना।। भेंटूँ जल गगरी नाचूँ बन चकरी हो चला पूरा सपना […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 858 =हाईकू= क्या बन पड़ी थी गुस्ताखी, जो बाद अर्से आये हो । दें गल्तियों की देते माफी, क्यों बाद अर्से आये हो ।। आ आज गये, न रह जाना, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 857 =हाईकू= कर दूँ नाम तेरे, मैं सरगम के सुर सारे । मन करता मेरा, पाँवों में तेरे बिछा दूँ तारे ।। सपना मेरा, है अकेला ही तो तू, अपना […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 856 =हाईकू= न कुछ-कुछ अपना, न बहुत-कुछ अपना । पता तुझे, मैं तुझे मानूँ सब-कुछ अपना ।। ये दिल मेरा, है तेरी ही तस्वीरों से भरा-पूरा । तू अपना ले […]
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